सच कहूं तो जिस रास्ते पर एक बार मुझे पटना से वाराणसी जाने में पूरे 8 घंटे की थकाऊ यात्रा करनी पड़ी थी, वही रास्ता अब सिर्फ कुछ घंटों की मजेदार ड्राइव में बदलने वाला है। लंबे इंतज़ार के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच की यह सपने जैसी कनेक्टिविटी अब हकीकत बनती दिख रही है। पटना और वाराणसी के बीच बन रहा नया 6-लेन एक्सप्रेसवे अब अपने आखिरी चरण में है। मेरे हिसाब से यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि लाखों यात्रियों, व्यापारियों और उन छात्रों के सपनों का रास्ता है जो हमेशा से इस तेज़ कनेक्टिविटी का इंतज़ार कर रहे थे।
अब खत्म होंगे झटके
कल्पना कीजिए, अभी जो सफर झटकों भरी सड़कों पर घंटों लेता है, वही सफर अब बिना रुके, बिना थके सिर्फ कुछ घंटों में पूरा हो जाएगा। लगभग 192 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे बिहार की पहली 6-लेन परियोजना है और यह वाराणसी को औरंगाबाद तक जोड़ेगा। सबसे अच्छी बात यह है कि इसका अधिकांश हिस्सा पुराने NH-2 के समानांतर बनाया जा रहा है, जिससे आपको रास्ता भी नहीं भटकना पड़ेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह कब शुरू होगा
ताजा जानकारी के मुताबिक, 2026 की शुरुआत या पहली छमाही तक यह एक्सप्रेसवे यात्रियों के लिए खुल सकता है। यानी अगले साल तक हम सब इस नए रास्ते पर गाड़ी दौड़ाते हुए देख सकते हैं। National Highways Authority of India की इस योजना ने उन लाखों लोगों को नई उम्मीद दी है जो रोजगार या व्यवसाय के सिलसिले में इन दोनों शहरों के बीच आते-जाते रहते हैं।
सिर्फ दो शहर नहीं पूरे क्षेत्र को नई उड़ान देगा
मुझे लगता है कि इसका फायदा सिर्फ पटना-वाराणसी तक सीमित नहीं रहेगा। यह एक्सप्रेसवे पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई उड़ान देगा। झारखंड और पश्चिम बंगाल तक के लिए भी यह रास्ता आसान हो जाएगा। औद्योगिक इलाकों, कारोबारी केंद्रों और यहां तक कि छात्रों के लिए भी यह एक वरदान साबित होगा। जिन लोगों को परिवार से दूर रहकर काम करना पड़ता है, उनके लिए तो यह किसी तोहफे से कम नहीं है यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं, यह एक ‘एक्सेस कंट्रोल्ड’ हाईवे होगा। मतलब यहां अनावश्यक कट, लगातार ट्रैफिक जाम और बार-बार रुकने की झंझट नहीं होगी। आप एक सुचारू गति से अपनी यात्रा पूरी कर पाएंगे। सड़क सुरक्षा और ड्राइविंग के अनुभव पर खास ध्यान दिया गया है, जो लंबी यात्रा को भी आरामदायक बना देगा।
यह सिर्फ सड़क नहीं आशाओं का प्रतीक है
मेरी नजर में यह परियोजना सिर्फ कंक्रीट और स्टील का ढांचा नहीं है। यह उन लाखों लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है जो बेहतर कनेक्टिविटी चाहते हैं। जब यह एक्सप्रेसवे चलने लगेगा, तो न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन, ऊर्जा और सबसे बढ़कर लोगों का धैर्य भी बचेगा। यह सरकार की वह सोच है जो दूरियों को कम करके लोगों को करीब लाना चाहती है। आने वाला समय बताएगा कि यह एक्सप्रेसवे कैसे पूरे क्षेत्र के विकास की गति को नई रफ्तार देता है।